मानव जाति के विकास के बाद से बच्चों को जन्म देने से, परिवार के लिए काम करके कमाने से लेकर ऊँचे से ऊँचे पहाड़ों पर चढ़ने तक, महिलाओं ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी जो पहचान बनाई है वह सराहनीय है।

हर साल, दुनिया भर से हजारों लोग माउंट एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने का प्रयास करते हैं। हालांकि, ऐसा करने के लिए अनुकूल मौसम की एक बहुत छोटी सी अवधि है (जून में मॉनसून की शुरुआत से पहले)। बहुत से लोग अपने इस सपने को जीते हुए अपनी तीव्र इच्छाशक्ति के दम पर इस चोटी पर पहुंच पाए हैं। कई भारतीय महिला माउंटेनीयर्स माउंट एवरेस्ट पर चढ़ कर विभिन्न श्रेणियों में ऐसा करने वाली पहली महिला भी बन गई हैं।

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अंशु जमसेंपा: हाल ही में, अरुणाचल प्रदेश की अंशु जमसेंपा, जो 32 वर्षीय दो बच्चों की माँ हैं, पांच दिनों में माउंट एवरेस्ट पर दो बार चढ़ने वाली एकमात्र महिला बन गई हैं। इससे पहले, एवरेस्ट पर चढ़ने का उसका पहला प्रयास वर्ष 2011 में था।

बचेंद्री पाल: बचेंद्री पाल १९८४ में एवरेस्ट तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला थीं। वह गिन्नीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में लिस्टेड हैं और भारत सरकार द्वारा भारत के चौथे उच्चतम नागरिक पुरस्कार, पद्म श्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हैं।

अरुणिमा सिन्हा भारतीय महिला माउंटेनीयर्स की सूची में २०१३ में एवेरेस्ट की चोटी तक पहुंचने वाली दुनिया में पहली अपंग महिला हैं। उन्होंने बचेंद्री पाल से  माउंटेनीयर की फॉर्मल  ट्रेनिंग ली थी। एक कृत्रिम पैर के साथ इस चोटी पर चढ़कर उन्होंने दुनिया को दिखाया कि कुछ भी करना असंभव नहीं है। 2015 में उन्हें इसके लिए पद्म श्री प्राप्त हुआ।

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मलावथ पूर्णा, एक 13 वर्षीय ने २०१४ में माउंट एवरेस्ट के शिखर तक पहुंचकर चमत्कार कर दिखाया था। 25 मई 2014 को, पूर्णा 13 वर्ष और 11 माह की उम्र में सबसे ऊंची चोटी पर पहुंची थी, और वर्तमान में वह सबसे कम उम्र की लड़की है जिसने एवरेस्ट के शिखर पर पहुंचकर अपना नाम रौशन किया।

ताशी और नुंग्शी मलिक: वर्ष 2013 में, ताशी और नुंग्शी मलिक 21 वर्ष की उम्र में एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ने वाली पहली जुड़वां बहनें हैं। इसके साथ ही, दोनों ने नार्थ पोल और साउथ पोल तक पहुंचने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया है। वे दुनिया की सभी सात शिखर पर चढ़ने वाली पहली भारतीय महिलाएँ हैं।

संतोष यादव: एक और महत्वपूर्ण माउंटेनियर जिन्होंने १९९२ में माउंट एवरेस्ट पर दो बार चढ़ाई करके 20 वर्ष की आयु में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।

डिकी डोल्मा १९९३ में एवरेस्ट पहुंचीं और तब वे एवेरेस्ट पर पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की महिला थी। वे एक महान स्पोर्ट्सवुमन हैं और उनके पास स्कीइंग और बेसिक माउंटेनीयरिंग कोर्स में फॉर्मल ट्रेनिंग भी है.

प्रेमलता अग्रवाल ने 48 वर्ष की उम्र में २०११ में माउंट एवरेस्ट चढ़कर पहली सबसे बुज़ुर्ग भारतीय महिला होने का रिकॉर्ड कायम किया। वह दुनिया की सात सबसे ऊँची चोटियों पर चढ़ने वाली पहली महिला भी हैं।

कृष्णा पाटिल एक और भारतीय महिला हैं, जो २००९ में यूरोप और अंटार्कटिका की सबसे ऊँची चोटियों की चढ़ाई के साथ एवरेस्ट पर चढ़ी थी।

इन महिलाओं और इनके सफलता कि कामयाबी को छूने के जज़्बे को हम सलाम करते हैं.

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